
जयपुर। नवगठित दूदू जिले में शामिल करने की संभावना के विरोध में जयपुर जिले की रेनवाल तहसील पूर्णतया (Renwal Closed) बंद रही। किसी भी हाल में दूदू (Dudu) जिले में शामिल नही होने की एक ही बात पर स्वतः चक्का जाम के रुप में रेनवाल की ऐतिहासिक एकता देखने को मिली। दिनांक 24 मार्च से तहसील के सामने दिये जा रहे अनिश्चितकालिन धरने में आज हजारो लोग शामिल हुये।
संघर्ष समिति के आह्वान पर रेनवाल नगरपालिका (Renwal Municipality) क्षेत्र के बाजार के साथ-साथ तहसील के गांवो के भी बाजार बंद (Closed) रहे। एक तरह से चक्का जाम के रुप में पूरी तहसील का व्यापार बंद रहा। सभी गांवो की दुकाने, प्रतिष्ठान, शिक्षण संस्थान आदि सभी बंद में शामिल रही। हजारो लोगो की उपस्थिति में संघर्ष समिति ने कडा रुख अपनाते हुये किसी भी सूरत में दूदू नही जाने का ऐलान किया।
लगभग 4 घण्टे से भी ज्यादा चले विशाल धरने में सैकडो वक्ताओ ने अपने जोशीले भाषण से संघर्ष को तेज किया। राज्य सरकार के संभावित फैसले के खिलाफ अपनी आवाज तेज करते हुये सरकार को भी चेताया तथा रेनवाल के साथ अन्याय नही करने की चेतावनी भी दी।

इस अवसर पर संघर्ष समिति ने तहसीलदार सुनीता चौधरी एवं जोबनेर डिप्टी मुकेश चौधरी को राज्य सरकार के नाम का ज्ञापन देकर क्षेत्र की आवाज को आगे पहुचाई। रेनवाल तहसील के संघर्ष को अपना समर्थन देते हुये विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी रहे विद्याधरसिंह चौधरी एवं दीनदयाल कुमावत भी धरने में शामिल हुये।
संघर्ष समिति की संयोजक टीम में शामिल रेनवाल व्यापार महासंघ अध्यक्ष अशोक असावा, पालिकाध्यक्ष अमित ओसवाल, प्रधान संतोष वर्मा, प्रधान प्रतिनिधी पति गिरधारी बरूड, सरपंच महेश बाजिया, रामपाल गीला, विजय सामोता, लालचंद मीणा, बाबुलाल चौधरी, युवा समाजसेवी सुरेश पूनिया, कल्याणमल ओला, शिक्षाविद रमेश यादव, विनोद रलावता, नगरपालिका प्रतिपक्ष नेता सीताराम बासनीवाल, भाजपा मण्डल अध्यक्ष लक्ष्मीकांत तोतला, राजेश रावत, वकील रामधन यादव, पंचायत समिति सदस्य मगनीराम ताकर, नगरपालिका वार्ड पंच धर्मेन्द्र चौधरी, राजीव तिवाडी, ईसाक मोहम्मद भाया तेली, किसान मोर्चा अध्यक्ष मंगलसिंह चौधरी, पूर्व प्रधान रणवीरसिंह शेखावत, शिक्षाविद मनरुपसिंह बेनीवाल, मन्नाराम तेतरवाल, रामनिवास खटनावलिया, कमल जैन, रामावतार भारद्वाज सहित रेनवाल नगरपालिका एवं ग्रामीण क्षेत्र के हजारो लोग उपस्थित रहे।
मंच संचालन अभिनय प्रकाश शारदा एवं जयनारायण प्रजापत ने किया। तहसील पर दिये जा रहे धरने को लेकर प्रशासन भी पूरी तरह से सावचेत नजर आया। (विष्णु जाखोटिया रिपोर्ट )