
शारदीय नवरात्रि (Shardiya Navratri 2021Kanya Pujan) 7 अक्टूबर से प्रारंभ हो चुके हैं। पंचांग (Panchang) के अनुसार इस बार आठवां नवरात्र 13 अक्टूबर को है और नौंवा नवरात्र 14 को। जबकि विजयादशमी (Vijyadashmi) यानी दशहरा (Dussehra 2021) 15 अक्टूबर को मनाया जाएगा। हिंदू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व होता है। नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि के दौरान कन्या पूजन (Kanya Pujan) का भी विधान है।
इस समय मां शक्ति से लोग अपने घर-परिवार पर कृपा बनाए रखने और अगले साल आने का अनुरोध करते हैं। देवी के दर्शन और 9 दिन तक व्रत और हवन करने के बाद कन्या पूजन (Kanya Pujan) का बड़ा महत्व माना गया है। कन्या पूजा सप्तमी से ही शुरू हो जाती है। सप्तमी, अष्टमी और नवमी के दिन कन्याओं को नौ देवी का रूप मानकर पूजा जाता है। इस दिन कन्याओं के पैरों को धोया जाता है और उन्हें आदर-सत्कार के साथ भोजन कराया जाता है। ऐसी मान्यता है कि जो भक्त कन्या पूजन (Kanya Pujan) करते हैं माता उन्हें सुख, समृद्धि एवं संपन्नता का वरदान देती हैं।
क्यों किया जाता है कन्या पूजन (Kanya Pujan):
देवी पुराण के अनुसार इंद्र ने जब ब्रह्मा जी से भगवती को प्रसन्न करने की विधि पूछी तो उन्होंने सर्वोत्तम विधि के रूप में कुमारी पूजन ही बताया था। नौ कुमारी कन्याओं और एक कुमार को विधिवत घर में बुलाकर और उनके पांव धोकर रोली-कुमकुम लगाकर पूजा-अर्चना की जाती है। इसके बाद उन्हें वस्त्र आभूषण, फल, पकवान और अन्न दिया जाता है। इससे भक्त पर मां शक्ति की कृपा हमेशा बनी रहती है।
कन्या पूजन (Kanya Pujan) का महत्व:
सभी शुभ कार्यों का फल प्राप्त करने के लिए हिंदू धर्म में कन्या पूजन किया जाता है। कुमारी पूजन से सम्मान, लक्ष्मी, विद्या और तेज प्राप्त होता है। इससे विघ्न, भय और शत्रुओं का नाश भी होता है। होम, जप और दान से देवी इतनी प्रसन्न नहीं होतीं जितनी की कन्या पूजन से होती हैं।
के रूप में मानकर पूजन के बाद ही भक्त व्रत पूरा करते हैं। भक्त अपने सामर्थ्य अनुसार भोग लगाकर दक्षिणा देते हैं। इससे माता अति प्रसन्न होती हैं। कन्या पूजन (Kanya Pujan) में दो से दस साल की 9 बच्चियों की पूजा की जाती है। इसके अलावा एक बालक होना भी जरुरी मन गया है।
ऐसे करें कन्या पूजन:
कन्या पूजन (Kanya Pujan) घर पर करना ज्यादा अच्छा है लेकिन किन्ही परिस्थितियों में मंदिर में भी जाकर कन्या पूजन किया जा सकता है। शास्त्रों के अनुसार 2 वर्ष से लेकर 10 वर्ष तक की कन्याओं को कन्या पूजा के लिए आमंत्रित करना चाहिए। कन्या पूजन (Kanya Pujan) में एक बालक का होना भी जरूरी माना गया है। कन्या पूजन वाले दिन सबसे पहले माता अम्बे की विधि विधान पूजा करनी चाहिए। इसके बाद कन्याओं और बालक के साफ जल से पैर धोएं। फिर कन्याओं और बालक को बैठने के लिए आसन दें।
फिर मां दुर्गा (Maa Durga) के समक्ष दीप प्रज्वलित करें और सभी कन्याओं और एक बालक को तिलक लगाएं और हाथ में कलावा बांधें। इसके बाद बालक और कन्याओं को भोजन परोसें। भोजन के बाद कन्याओं को अपने सामर्थ्य अनुसार दक्षिणा या उपहार देना चाहिए । फिर सभी कन्याओं के पैर छूकर उनका आशीर्वाद प्राप्त कर उन्हें सम्मान के साथ विदा करना चाहिए।
दरअसल, दो वर्ष की कुमारी, तीन वर्ष की त्रिमूर्ति, चार वर्ष की कल्याणी, पांच वर्ष की रोहिणी, छ वर्ष की बालिका, सात वर्ष की चंडिका, आठ वर्ष की शाम्भवी, नौ वर्ष की दुर्गा और दस वर्ष की कन्या सुभद्रा कहलाती हैं।