
जयपुर। राजस्थान विश्वविद्यालय (RU) के शिक्षकों का एक प्रतिनिधिमंडल सामग्री के साथ किसान आंदोलन (Farmer protest) में सम्मिलित होने के लिए रवाना हुआ है। शिक्षक डॉ. सी.बी.यादव ने बताया कि राजस्थान विश्वविद्यालय (RU) का शिक्षक तीन कृषि कानूनों के अध्यादेश जारी करने के दिन से ही लगातार उनके विरोध में रहा है। इसके लिए कई बार अपना विरोध प्रदर्शन प्रदर्शित कर चुका है।
23 दिसंबर, किसान दिवस के अवसर पर शिक्षकों ने किसान आंदोलन (Farmer protest) के समर्थन में उपवास रखा था एवं आंदोलन को नैतिक समर्थन के साथ साथ आर्थिक समर्थन दिए जाने का भी निर्णय लिया था। उन्होंने कहा कि विश्व विद्यालय के शिक्षक 3 कानूनों के माध्यम से खेती किसानी में कॉरपोरेट्स के प्रवेश से अधिक जिस प्रकार से केंद्र सरकार आंदोलन के प्रति सामान्य एवं लोकतांत्रिक तरीका अपना रही है उसकी कड़े शब्दों में आलोचना करता है।
शिक्षक डॉ. मनीष सिनसिनवार ने बताया कि शिक्षकों ने विश्वविद्यालय के व्हाट्सएप ग्रुप एक अभियान चलाकर किसान आंदोलन (Farmer protest) के लिए आर्थिक सहायता जुटाने की मुहिम चलाई जिसके तहत सैकड़ों शिक्षकों ने आर्थिक सहायता प्रदान की। विश्वविद्यालय के शिक्षकों ने किसान आंदोलन (Farmer protest) में सम्मिलित किसानों के लिए कंबल गर्म कपड़े एवं खाद्य सामग्री के साथ-साथ आंदोलन के प्रबंधन में होने वाले जरनैटर टेंट एवं अन्य आवश्यक खर्चों को 2 सप्ताह के लिए उठाने की जिम्मेदारी उठाई है।
लोक प्रशासन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. ओम महला ने किसान आंदोलन (Farmer protest) में दिल्ली जाने वाले शिक्षक प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई की । उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि शिक्षकों का एक बड़ा वर्ग भी किसान वर्कशीट से आता है इसीलिए इस आंदोलन को नैतिक समर्थन के साथ साथ शिक्षकों ने अपने दायित्वों का निर्माण समझते हुए आर्थिक संभल भी प्रदान कर रहा है । इससे अन्य क्षेत्र के जागरूक नागरिकों को भी प्रेरणा प्राप्त होगी।
किसान आंदोलन (Farmer protest) में सम्मिलित होने वाले शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल में डॉ. लादूराम जाट, डॉ. मनमोहन, डॉ. मोहन नायक, डॉ. डी. सुधीर, डॉ. संजीव कुमार, डॉ. पूराराम, डॉ. मामराज, डॉ. कैलाश समोता, डॉ. गजेंद्र फोगाट, डॉ. वीरेंद्र कुमार, डॉ. प्रदीप कुमार सहित कई शिक्षक रसद सामग्री के साथ कारों से रवाना हुए।