Shani Jayanti 2023: न्याय और कर्म फलदाता शनि की जयंती आज, कुंडली में मौजूद शनि दोषों से छुटकारा पाने के लिए करें ये उपाय !

Shani Jayanti 2023: न्याय और कर्म फलदाता शनि की जयंती आज, कुंडली में मौजूद शनि दोषों से छुटकारा पाने के लिए करें ये उपाय !
Shani Jayanti 2023: न्याय और कर्म फलदाता शनि की जयंती आज, कुंडली में मौजूद शनि दोषों से छुटकारा पाने के लिए करें ये उपाय !

Shani Jayanti 2023: ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि शनि जयंती (Shani Jayanti) मनाई जा रही है। हिंदू पंचांग (Hindu Panchang) के अनुसार भगवान शनि (God Shani) का जन्म ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को हुआ था। भगवान शनि को ज्योतिष (Astrology) में न्याय और कर्म फलदाता माना गया है। हर साल ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि को भगवान शनिदेव का जन्मोत्सव बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है।

ऐसी मान्यता है शनि की अशुभ छाया जिस किसी पर पड़ जाती है उनके जीवन में उन्हें तमाम तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इन परेशानियों को दूर करने के लिए और कुंडली में मौजूद शनि दोषों से छुटकारा पाने के लिए भगवान शनि देव की पूजा अर्चना की जाती है। आपको बता दें कि इस शनि जयंती पर बहुत ही खास और दुर्लभ योग बन रहा है।

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शनिदेव (Shani Jayanti) की पूजा के लिए अमावस्या तिथि का विशेष महत्व होता है। ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि पर भगवान (God) शनि का जन्म हुआ था ऐसे में शनि जयंती पर सबसे पहले सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करते हुए भगवान सूर्यदेव को जल चढ़ाएं फिर पूजा का संकल्प लेते हुए साफ-सुथरे वस्त्र पहने। इसके बाद अपने घर के पास बने शनि मंदिर जाकर भगवान शनि की पूजा करें।

पूजा में शनिदेव को सरसों के तेल से अभिषेक करें, फिर इत्र, गुलाब, सिंदूर, कुमकुम, काजल, अबीर, गुलाल, नीले रंग का फूल और काला तिल आदि अर्पित करें। इसके बाद तेल का दीपक जलाएं और अंत में शनि चालीसा मंत्र का विधि-विधान से जाप करें और शनिदेव की आरती करें।

शास्त्रों में पीपल के पेड़ में शनिदेव (Shani Dev) का वास माना गया है ऐसे में कुंडली से शनि दोष को खत्म करने के लिए शनि जयंती पर पीपल के जड़ में जल चढ़ाएं और तेल का दीपक जलाएं। आज के दिन शनि देव को बेसन के लड्डू व कचोरी का भोग लगाने के विशेष लाभ मिलते हैं। इसके अलावा शनि जयंती से शुरू कर हर शनिवार के दिन शनिदेव के मंत्र ‘ऊं प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नम:’ की एक माला का जाप करें और शनि चालीसा का पाठ करें। इसके अलावा शनि देव की पूजा के साथ-साथ हनुमानजी की भी पूजा करें।

(Disclaimer: इस स्टोरी (लेख) में दी गई सूचनाएं सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित हैं। यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। thenewsworld24 .com इनकी पुष्टि नहीं करता है। इन तथ्यों को अमल में लाने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें।)

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