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	<title>Lord Krishna &#8211; The News World 24</title>
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		<title> Karwa Chauth 2024:  करवा चौथ व्रत तिथि और मुहूर्त, जानें आपके शहर में कब होगा चंद्रोदय ?</title>
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		<pubDate>Sat, 19 Oct 2024 17:11:37 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[Karwa Chauth 2024 : हिन्दू पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन करवा चौथ (Karwa Chauth) का व्रत आता है। कल देशभर में करवा चौथ&#8230; ]]></description>
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<figure class="aligncenter size-large is-resized"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="1024" height="576" src="https://thenewsworld24.com/wp-content/uploads/2024/10/WhatsApp-Image-2024-10-19-at-22.01.30_5c2121a8-1024x576.jpg" alt="Karwa Chauth 2024: करवा चौथ व्रत तिथि और मुहूर्त, जानें आपके शहर में कब होगा चंद्रोदय ?" class="wp-image-12620" style="width:858px;height:auto" title="The News World 24" srcset="https://thenewsworld24.com/wp-content/uploads/2024/10/WhatsApp-Image-2024-10-19-at-22.01.30_5c2121a8-1024x576.jpg 1024w, https://thenewsworld24.com/wp-content/uploads/2024/10/WhatsApp-Image-2024-10-19-at-22.01.30_5c2121a8-300x169.jpg 300w, https://thenewsworld24.com/wp-content/uploads/2024/10/WhatsApp-Image-2024-10-19-at-22.01.30_5c2121a8-768x432.jpg 768w, https://thenewsworld24.com/wp-content/uploads/2024/10/WhatsApp-Image-2024-10-19-at-22.01.30_5c2121a8-150x84.jpg 150w, https://thenewsworld24.com/wp-content/uploads/2024/10/WhatsApp-Image-2024-10-19-at-22.01.30_5c2121a8.jpg 1280w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /><figcaption class="wp-element-caption"><strong>Karwa Chauth 2024: करवा चौथ व्रत तिथि और मुहूर्त, जानें आपके शहर में कब होगा चंद्रोदय ?</strong></figcaption></figure></div>


<p><strong>Karwa Chauth 2024</strong> : हिन्दू पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन करवा चौथ (Karwa Chauth) का व्रत आता है। कल देशभर में करवा चौथ (Karwa Chauth) का <a href="https://thenewsworld24.com/news/devotional-news/chief-minister-tied-rakhi-to-brave-women-on-raksha-bandhan-festival/12323/" data-type="link" data-id="https://thenewsworld24.com/news/devotional-news/chief-minister-tied-rakhi-to-brave-women-on-raksha-bandhan-festival/12323/">पर्व (Festival)</a> मनाया जाएगा। भगवान श्रीकृष्ण (Lord Krishna) ने द्रौपदी को और शिव ने पार्वती को इस व्रत के बारे में बताया था। इस दिन मूलतः भगवान गणेश (Lord Ganesha), मां गौरी और चंद्रमा की पूजा की जाती है। चंद्रमा को सामान्यत: आयु, सुख और शांति का कारक माना जाता है। इसलिए चंद्रमा की विधिवत पूजा कर सुहागनें वैवाहिक जीवन में सुख, शांति और पति की लंबी आयु की कामना करती हैं।</p>



<h2 class="wp-block-heading">करवा चौथ व्रत तिथि और मुहूर्त  (Karwa Chauth 2024 Shubh Muhurt): </h2>



<p>पंचांग के अनुसार, कार्तिक कृष्ण चतुर्थी तिथि 20 अक्टूबर को सुबह 06.46 बजे से शुरू होगी और 21 अक्टूबर को सुबह 04.16 बजे तक रहेगी। ऐसे में करवा चौथ का व्रत 20 अक्टूबर दिन रविवार को रखा जाएगा। करवा चौथ पर पूजा का शुभ मुहूर्त 20 अक्टूबर की शाम 5 बजकर 46 मिनट से शाम 7 बजकर 02 मिनट तक रहेगा। करवा चौथ पर सुहागिन महिलाएं दिनभर निर्जला व्रत रखते हुए शाम को सोलह श्रृंगार करते हुए एक खास जगह पर एकत्रित होकर करवा माता की पूजा और कथा सुनती हैं। करवा चौथ व्रत के दिन पूजा के दौरान चंद्रमा को अर्घ्य देते समय सबसे पहले कुछ मंत्रों का जाप करना चाहिए। ये मंत्र ‘ॐ श्रां श्रीं श्रौं स: चन्द्रमसे नम:, ॐ श्रीं श्रीं चन्द्रमसे नम:, ऊँ दधिशंखतुषाराभं क्षीरोदार्णवसंभवम. नमामि शशिनं सोमं शंभोर्मुकुटभूषणम’ हैं। </p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>पूजा की थाली को सजाने के तरीके</strong>: </h2>



<p>वैसे तो बाजार में डेकोरेट थालियां मिल जाती हैं, लेकिन अगर आप घर पर ही पूजा की थाली को सजाना चाहते हैं तो सबसे पहले एक बड़े आकार की थाली लें, जिसमें सारा सामान सेट किया जा सके। थाली पर आप पेंट कलर से फूल, सुंदर कलाकृति या ओम आदि लिखकर भी सजा सकते हैं। इसके अलावा हल्दी को चावल के आटे के घोल में मिलाकर उससे भी थाली पर स्वास्तिक या ओम बना सकते हैं। इसके बाद फूलों की पंखुड़ियों से थाली को सजाएं। अब करवा चौथ की पूजा के लिए जरूरी सामान को थाली में सेट करें। आप जल के लोटे और थाली में मौजूद सभी बर्तनों पर भी स्वास्तिक बना सकते हैं। साथ ही थाली के किनारे पर गोलाई से गोटा पट्टी को भी चिपका सकते हैं &nbsp;ये भी देखने में आकर्षक लगता है।</p>



<p><strong>पूजा की थाली सजाने के लिए सामग्री</strong>: <br>करवा (मिट्टी या धातु का पात्र)<br>दीया (तेल या घी का दीपक)<br>रोली या कुमकुम&nbsp;<br>पानी का लोटा (अर्घ्य के लिए)<br>चलनी (चांद देखने के लिए)<br>अक्षत, चंदन, धूप, फूल, मिठाई, सिंदूर, फल</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>करवा चौथ (Karwa Chauth) की कथा</strong>:</h2>



<p>करवा चौथ (Karwa Chauth) व्रत की पौराणिक मान्यताएं भी है। जिससे अनुसार पति की लम्बी उम्र के लिए व्रत की परंपरा सतयुग से चली आ रही है। इसकी शुरुआत सावित्री के पतिव्रता धर्म से हुई। जब यम आए तो सावित्री ने अपने पति को ले जाने से रोक दिया और अपनी दृढ़ प्रतिज्ञा से पति को फिर से पा लिया। तब से पति की लम्बी उम्र के लिए व्रत किये जाने लगा। वहीं एक दूसरी पौराणिक कथा के अनुसार महाभारत में वनवास काल में अर्जुन तपस्या करने नीलगिरि के पर्वत पर चले गए थे तब द्रोपदी ने अर्जुन की रक्षा के लिए भगवान कृष्ण से मदद मांगी। उन्होंने द्रौपदी को वैसा ही उपवास रखने को कहा जैसा माता पार्वती ने भगवान शिव के लिए रखा था। द्रौपदी ने ऐसा ही किया और कुछ ही समय के बाद अर्जुन वापस सुरक्षित लौट आए।</p>



<h2 class="wp-block-heading">करवा चौथ (Karwa Chauth) पर चाँद दिखने का समय:</h2>



<p>दिल्ली में रात 7:53 बजे, नोएडा में रात 7:52 बजे, मुंबई में रात 8: 36 बजे, कोलकाता में रात 7: 22 बजे, चंडीगढ़ में रात 7: 48 बजे, पंजाब में रात 7:48 बजे, मेरठ में रात 7:51 बजे, जम्मू में रात 7:52 बजे, लुधियाना में रात 7:52 बजे, अमृतसर व गुरुग्राम में रात 7:55 बजे, देहरादून में रात 7:24 बजे, शिमला में रात 7:47 बजे, पटना में रात 7:29 बजे, लखनऊ में रात 7:42 बजे, कानपुर में रात 7:47 बजे, प्रयागराज में रात 7:42 बजे, इंदौर में रात 8:15 बजे, भोपाल में रात 8:07 बजे, अहमदाबाद में रात 8:27 बजे, चेन्नई में रात 8:18 बजे, बेंगलुरु में रात 8:30 बजे, जयपुर में रात 8:05 बजे, रायपुर में रात 7:43 बजे, आगरा में रात 7:53 बजे, रांची में रात 7:33 बजे, बनारस में रात 07:38 बजे, ग्वालियर में रात 07:56 बजे होगा चंद्रोदय।</p>



<p>(Disclaimer: इस स्टोरी (लेख) में दी गई सूचनाएं सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित हैं। यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। thenewsworld24.com इनकी पुष्टि नहीं करता है। इन तथ्यों को अमल में लाने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें।)</p>
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		<title>मथुरा का द्वारकाधीश का मंदिर, जानें इतिहास, मंदिर खुलने का समय और कैसे पहुंचे ?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[The News World 24]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 20 Feb 2024 11:48:35 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मथुरा का द्वारकाधीश का मंदिर (Dwarkadhish Temple of Mathura): उत्तर प्रदेश के मथुरा में सबसे पवित्र मंदिरों में से एक है जिसे “द्वारकाधीश का मंदिर” “द्वारकाधीश जगत मंदिर” (Dwarkadhish Jagat&#8230; ]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter size-full is-resized"><img decoding="async" width="800" height="455" src="https://thenewsworld24.com/wp-content/uploads/2024/02/dwarkadhish-mathura-20-02-2024.jpg" alt="मथुरा का द्वारकाधीश का मंदिर, जानें इतिहास, मंदिर खुलने का समय और कैसे पहुंचे ?" class="wp-image-11911" style="width:930px;height:auto" title="The News World 24" srcset="https://thenewsworld24.com/wp-content/uploads/2024/02/dwarkadhish-mathura-20-02-2024.jpg 800w, https://thenewsworld24.com/wp-content/uploads/2024/02/dwarkadhish-mathura-20-02-2024-300x171.jpg 300w, https://thenewsworld24.com/wp-content/uploads/2024/02/dwarkadhish-mathura-20-02-2024-768x437.jpg 768w, https://thenewsworld24.com/wp-content/uploads/2024/02/dwarkadhish-mathura-20-02-2024-150x85.jpg 150w" sizes="(max-width: 800px) 100vw, 800px" /><figcaption class="wp-element-caption"><strong>मथुरा का द्वारकाधीश का मंदिर, जानें इतिहास, मंदिर खुलने का समय और कैसे पहुंचे ?</strong></figcaption></figure></div>


<p><strong>मथुरा का द्वारकाधीश का मंदिर (Dwarkadhish Temple of Mathura</strong>)<strong>:</strong> उत्तर प्रदेश के <a href="https://thenewsworld24.com/news/devotional-news/domestic-and-foreign-tourists-also-come-to-see-lathmar-holi-of-barsana-in-the-month-of-phalgun/11884/">मथुरा </a>में सबसे पवित्र मंदिरों में से एक है जिसे “द्वारकाधीश का मंदिर” “द्वारकाधीश जगत मंदिर” (Dwarkadhish Jagat Mandir) और “द्वारकाधीश के राजा” जैसे प्रसिद्ध नामो से जाना जाता है। भगवान कृष्ण को समर्पित “द्वारकाधीश मंदिर” का निर्माण 1814 में एक कृष्ण भक्त द्वारा करवाया गया था। मंदिर में पूजे जाने वाले मुख्य देवता भगवान द्वारकाधीश (Dwarkadhish) हैं, जो भगवान कृष्ण का दूसरा नाम हैं।&nbsp;<a href="https://thenewsworld24.com/news/the-market-was-painted-in-the-colors-of-laddu-gopal-on-krishna-janmashtami/5231/">भगवान कृष्ण (Lord Krishna)</a> की मूर्ति मंत्रमुग्ध कर देने वाली मुद्रा में खड़ी है, जो गहनों और परिधानों से सजी हुई है। इस मंदिर में हजारों श्रद्धालु प्रतिदिन द्वारकाधीश के दर्शन के लिए आते हैं। द्वारकाधीश मंदिर अपनी विस्तृत वास्तुकला और चित्रों के लिए देश भर में प्रसिद्ध है जो भगवान कृष्ण के जीवन के विभिन्न पहलुओं दर्शाती है। द्वारकाधीश मंदिर मानसून की शुरुआत में मनाये जाने वाले अद्भुद झूले उत्सव के लिए भी जाना-जाता है, जिस दौरान हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों की भीड़ देखी जाती है।</p>



<p>मथुरा में द्वारकाधीश (Dwarkadhish) मंदिर&nbsp;भारत&nbsp;में सबसे महत्वपूर्ण और प्रतिष्ठित हिंदू मंदिरों में से एक है।&nbsp;मथुरा के मध्य में स्थित, यह शहर भगवान कृष्ण के साथ अपने गहरे जुड़ाव के लिए जाना जाता है, यमुना नदी (Yamuna River) के तट पर स्थित यह मंदिर अत्यधिक धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व रखता है।  </p>



<h2 class="wp-block-heading">द्वारकाधीश मंदिर मथुरा का इतिहास (History of Dwarkadhish Temple Mathura):</h2>



<p>द्वारकाधीश (Dwarkadhish) मंदिर का इतिहास करीब 200 साल पुराना है। द्वारकाधीश जगत मंदिर का निर्माण 1814 में भगवान कृष्ण के परम भक्त एक धनी व्यापारी सेठ गोकुलदास पारीख द्वारा शुरू किया गया लेकिन उनके देहांत हो जाने के बाद उनके पुत्र लक्ष्मीचन्द्र ने मंदिर का निर्माण पूरा करवाया। वर्ष 1930 में पूजन के लिए द्वारकाधीश मंदिर को पुष्टिमार्ग के आचार्य गिरधरलाल जी को सौप दिया गया था और तब इस मंदिर में पुष्टिमार्गीय विधि के अनुसार पूजन किया जाता है ।</p>



<p>अपनी वास्तुकला और चित्रों के लिए प्रसिद्ध द्वारकाधीश मंदिर की वास्तुकला बेहद आकर्षक और मनमोहक है। मंदिर की मुख्य इमारत को आकर्षक राजस्थानी शैली में निर्मित किया गया है और इस इमारत में एक भव्य प्रवेश द्वार है। मंदिर के यार्ड में सुन्दर चित्रित छत है जो तीन नक्काशीदार स्तंभों पर खड़ी हुई है। इन स्तंभों और छत में की गयी नक्काशी और चित्रों के माध्यम से भगवान कृष्ण के जीवन की कहानी को दर्शाया गया है। मंदिर की अनूठी विशेषताओं में से एक इसका भव्य प्रवेश द्वार है, जो भगवान कृष्ण के जीवन के विभिन्न प्रसंगों को दर्शाते सुंदर चित्रों और जटिल नक्काशी से सुसज्जित है।</p>



<p>आप जैसे ही भव्य मंदिर के अंदर जाने के लिए सीढ़ियों पर चढ़ते हो तो सबसे पहले नक्काशीदार स्तंभों की पाँच पंक्तियाँ को देखते हैं, जो पूरे आँगन को तीन अलग-अलग खंडों में विभाजित करती हैं जिसमे दायीं लाइन महिलाओं के लिए है और पुरुषों के लिए बायीं लाइन है, जबकि सेंटर लाइन वीआईपी पास वालों के लिए है। यहाँ दान पेटियां भी रखी गई है।</p>



<p>ठीक सामने गर्भगृह है जहाँ द्वारकाधीश जी की पवित्र मूर्ति स्थापित है। मंदिर में “द्वारकाधीश के राजा” (Dwarkadhish Ke Raja) के दर्शन के साथ- साथ दीवारों और आंगन की छत पर सुंदर पेंटिंग भी देखी जा सकती है जिनमे कृष्ण के जन्म के दृश्य और कई अन्य लोगों द्वारा उनके द्वारा रास नृत्य के प्रदर्शन को दिखाया गया है। मंदिर में मुख्य मूर्ति के अलावा, आप कई अन्य हिंदू देवताओं और छोटे तुलसी के पौधे को भी देख सकते हैं जो भगवान के प्रिय हैं और उनके भक्तों के लिए अत्यधिक पूजनीय हैं।</p>



<p>“द्वारकाधीश का मंदिर” अपनी भक्तिमय वातावरण के साथ साथ मंदिर में मनाये जाने वाले कुछ उत्सवो के लिए भी काफी प्रसिद्ध है जिन्हें बड़े धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।</p>



<p><strong>जन्माष्टमी (Janmashtami</strong>)<strong>:</strong>&nbsp;भगवान कृष्ण की जयंती, जन्माष्टमी, द्वारकाधीश मंदिर में बेहद खुशी और उत्साह के साथ मनाई जाती है।&nbsp;सजावट, भक्ति संगीत और सांस्कृतिक प्रदर्शन उत्सव का माहौल बनाते हैं।</p>



<p><strong>होली (Holi):</strong>&nbsp;रंगों का त्योहार होली द्वारकाधीश मंदिर में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है।&nbsp;भक्त रंगों से खेलने और जीवंत संगीत और नृत्य प्रदर्शन में शामिल होने के लिए इकट्ठा होते हैं।&nbsp;मंदिर परिसर रंगों और हर्षोल्लास के उत्सव का गवाह बनता है।</p>



<p><strong>राधाष्टमी (Radhashtami</strong>)<strong>:</strong>&nbsp;राधाष्टमी भगवान कृष्ण की दिव्य पत्नी राधा को समर्पित है।&nbsp;मंदिर में विशेष प्रार्थनाएँ, भक्ति गायन और जुलूस देखे जाते हैं क्योंकि भक्त राधा का जन्मोत्सव मनाते हैं।&nbsp;माहौल भक्ति और श्रद्धा से भरा हुआ है।</p>



<p><strong>अन्नकूट (Annakoot</strong>)<strong>:</strong>&nbsp;अन्नकूट, जिसे गोवर्धन पूजा के नाम से भी जाना जाता है, द्वारकाधीश मंदिर में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण त्योहार है।&nbsp;यह भगवान कृष्ण द्वारा ग्रामीणों को मूसलाधार बारिश से बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत उठाने के कृत्य की याद दिलाता है।&nbsp;भक्त भगवान कृष्ण के प्रति कृतज्ञता और भक्ति के प्रतीक के रूप में भोजन का पर्वत (अन्नकूट) चढ़ाते हैं।</p>



<p><strong>हिंडोला उत्सव </strong>(<strong>झूलन यात्रा</strong>):  श्रावण (अगस्त-सितंबर) के हिंदू महीने के दौरान मनाया जाना वाला हिंडोला उत्सव द्वारकाधीश जगत मंदिर मथुरा का एक और प्रसिद्ध उत्सव है जिसे “झुला&nbsp; उत्सव” के नाम से भी जाना जाता है। इस उत्सव में राधा रानी और कृष्ण जी की मूर्ति को सोने चांदी से लेकर , फूल पत्ती, जरी, रंग बिरंगे वस़्त्रों से लेकर फलों से मिलकर बने हिंडोला या झूले में रखा जाता है और उन्हें झुलाया जाता है।</p>



<p>मंदिर में प्रवेश और द्वारकाधीश के दर्शन के लिए कोई भी शुल्क नही है यहाँ आप बिना किसी शुल्क का भुगतान किये द्वारकाधीश जगत मंदिर में घूम और दर्शन कर सकते है। गर्मियों में मंदिर प्रातः 6 : 30 बजे से 10: 30 बजे तक सांयकाल 4 : 00 बजे से 7 : 00 बजे तक खुला रहता है वही सर्दियों में प्रातः 6 : 30 बजे से 10: 30 बजे तक सांयकाल 3 : 30 बजे से 6 : 00 बजे तक खुला रहता है। मौसम और विशिष्ट दिनों के आधार पर समय थोड़ा भिन्न हो सकता है।&nbsp;अपनी यात्रा की योजना बनाने से पहले आरती के समय में किसी भी अपडेट या बदलाव के लिए मंदिर अधिकारियों या आधिकारिक वेबसाइट से जांच करना उचित है।</p>


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<figure class="aligncenter size-full is-resized"><img decoding="async" width="800" height="452" src="https://thenewsworld24.com/wp-content/uploads/2024/02/yamuna-mathura-20-02-2024.jpg" alt="मथुरा का द्वारकाधीश का मंदिर, जानें इतिहास, मंदिर खुलने का समय और कैसे पहुंचे ?" class="wp-image-11912" style="width:932px;height:auto" title="The News World 24" srcset="https://thenewsworld24.com/wp-content/uploads/2024/02/yamuna-mathura-20-02-2024.jpg 800w, https://thenewsworld24.com/wp-content/uploads/2024/02/yamuna-mathura-20-02-2024-300x170.jpg 300w, https://thenewsworld24.com/wp-content/uploads/2024/02/yamuna-mathura-20-02-2024-768x434.jpg 768w, https://thenewsworld24.com/wp-content/uploads/2024/02/yamuna-mathura-20-02-2024-150x85.jpg 150w" sizes="(max-width: 800px) 100vw, 800px" /></figure></div>


<p>मथुरा में विश्राम घाट यमुना नदी पर एक पवित्र स्नान घाट है।&nbsp;यह अपने आध्यात्मिक महत्व और शाम की आरती समारोह के लिए जाना जाता है।&nbsp;पर्यटक पवित्र स्नान कर सकते हैं, नाव की सवारी का आनंद ले सकते हैं और मंदिरों और तीर्थस्थलों का भ्रमण कर सकते हैं।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>द्वारकाधीश मंदिर (Dwarkadhish Temple</strong>)<strong>, मथुरा कैसे पहुंचें?</strong></h2>



<p>मथुरा जंक्शन एक प्रमुख रेलवे स्टेशन है जो भारत भर के विभिन्न शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।&nbsp;मथुरा से नियमित ट्रेनें चलती रहती हैं।&nbsp;रेलवे स्टेशन से, आप द्वारकाधीश मंदिर तक पहुंचने के लिए टैक्सी किराए पर ले सकते हैं या ऑटो-रिक्शा ले सकते हैं।</p>



<p>मथुरा सड़क मार्ग द्वारा भारत के प्रमुख शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।&nbsp;राष्ट्रीय राजमार्गों और राज्य राजमार्गों के माध्यम से शहर तक आसानी से पहुंचा जा सकता है।&nbsp;मथुरा पहुंचने के लिए आप या तो अपना वाहन चला सकते हैं या बस ले सकते हैं।&nbsp;राज्य द्वारा संचालित बसें और निजी बसें आसपास के शहरों और कस्बों से मथुरा के लिए नियमित सेवाएं संचालित करती हैं।</p>



<p>मथुरा से निकटतम हवाई अड्डा आगरा हवाई अड्डा है, जो लगभग 60 किलोमीटर दूर स्थित है।&nbsp;हवाई अड्डे से, आप मथुरा पहुंचने के लिए टैक्सी किराए पर ले सकते हैं या बस ले सकते हैं।</p>



<h2 class="wp-block-heading">मथुरा का द्वारकाधीश का मंदिर (Dwarkadhish Temple of Mathura):</h2>



<figure class="wp-block-embed is-type-video is-provider-youtube wp-block-embed-youtube wp-embed-aspect-16-9 wp-has-aspect-ratio"><div class="wp-block-embed__wrapper">
<iframe loading="lazy" title="भाग - 5; मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि व द्वारकाधीश मंदिर देखा, परिक्रमा समिति के। The News World 24 Plus" width="1110" height="624" src="https://www.youtube.com/embed/Q0BOpt2n11g?feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture; web-share" allowfullscreen></iframe>
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<p>(Disclaimer: इस स्टोरी (लेख) में दी गई सूचनाएं सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित हैं। यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। thenewsworld24.com इनकी पुष्टि नहीं करता है। इन तथ्यों को अमल में लाने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें।)</p>
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		<title>Phulera Dooj 2023:  फुलेरा दूज पर होंगे मांगलिक कार्य, फुलेरा दूज शादी के लिए माना जाता है अबूझ मुहूर्त !</title>
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		<dc:creator><![CDATA[The News World 24]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 20 Feb 2023 14:04:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Devotional News]]></category>
		<category><![CDATA[flower holi]]></category>
		<category><![CDATA[Hindu Panchang]]></category>
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					<description><![CDATA[हिन्दू पंचांग (Hindu Panchang) के अनुसार, फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को फुलेरा दूज (Phulera Dooj) का पर्व मनाया जाता है। फुलेरा दूज के दिन भगवान श्री&#8230; ]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://thenewsworld24.com/wp-content/uploads/2023/02/phulera-dooj-20-02-2023-The-News-World-24.jpg" alt="Phulera Dooj 2023: फुलेरा दूज पर होंगे मांगलिक कार्य,  फुलेरा दूज शादी के लिए माना जाता है अबूझ मुहूर्त !" class="wp-image-10871" width="928" height="522" title="The News World 24" srcset="https://thenewsworld24.com/wp-content/uploads/2023/02/phulera-dooj-20-02-2023-The-News-World-24.jpg 800w, https://thenewsworld24.com/wp-content/uploads/2023/02/phulera-dooj-20-02-2023-The-News-World-24-300x169.jpg 300w, https://thenewsworld24.com/wp-content/uploads/2023/02/phulera-dooj-20-02-2023-The-News-World-24-768x432.jpg 768w, https://thenewsworld24.com/wp-content/uploads/2023/02/phulera-dooj-20-02-2023-The-News-World-24-150x84.jpg 150w" sizes="(max-width: 928px) 100vw, 928px" /><figcaption class="wp-element-caption"><strong>Phulera Dooj 2023: फुलेरा दूज पर होंगे मांगलिक कार्य,  फुलेरा दूज शादी के लिए माना जाता है अबूझ मुहूर्त !</strong></figcaption></figure></div>


<p><a href="https://thenewsworld24.com/news/devotional-news/devshayani-ekadashi-20-july-2021-on-tuesday-manglik-work-will-stop-for-four-months/4310/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">हिन्दू पंचांग (Hindu Panchang)</a> के अनुसार, फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को फुलेरा दूज (Phulera Dooj) का पर्व मनाया जाता है। फुलेरा दूज के दिन भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी की पूजा की जाती है। इसके साथ ही ब्रज में श्री कृष्ण और मां राधा के साथ फूलों की होली खेली जाती है। माना जाता है कि अन्य शुभ मुहूर्तों की तरह फुलेरा दूज (Phulera Dooj) का दिन भी काफी खास होता है। फुलेरा दूज मांगलिक और शुभ काम करने का शुभ मुहूर्त माना जाता है। इस दिन सगाई, विवाह सहित अन्य शुभ काम करना अच्छा माना जाता है। फुलेरा दूज को शादी व शुभ कार्यो के लिए अबूझ मुहूर्त माना गया है।</p>



<p>शास्त्रों के अनुसार, फूलेरा दूज के दिन शुभ और मांगलिक कामों को करने शुभ फलों की प्राप्ति होगी। इस समय गुरु बृहस्पति उदय है। इसलिए शादी-विवाह जैसे मांगलिक काम करना शुभ होगा। इसके अलावा मुंडन, छेदन, गृह प्रवेश, वाहन खरीदना शुभ साबित होगा। आप चाहे तो फुलेरा दूज के दिन नए काम, व्यवसाय ,बिजनेस की भी शुरुआत कर सकते हैं।</p>



<h2 class="wp-block-heading">फुलेरा दूज 2023 (Phulera Dooj 2023) शुभ मुहूर्त:</h2>



<p>फुलेरा दूज द्वितीया तिथि आरंभ- 21 फरवरी 2023, मंगलवार को सुबह 09 बजकर 04 मिनट पर शुरू</p>



<p>द्वितीया तिथि का समापन- 22 फरवरी को सुबह 05 बजकर 57 मिनट पर होगा।</p>



<p>गोधूलि मुहूर्त &#8211; 21 फरवरी को शाम 06 बजकर 13 मिनट से लेकर शाम 06 बजकर 38 मिनट तक</p>



<p>शास्त्रों के अनुसार, एक बार भगवान कृष्ण अधिक व्यस्त थे जिसके कारण काफी लंबे समय तक राधा रानी से नहीं मिल पाए थे। ऐसे में राधा रानी काफी उदास रहने लगी थी। राधा रानी के उदास रहने से प्रकृति पर बुरा असर पड़ने लगा था। ऐसे में पेड़, पौधे, फूल, वन आदि धीरे-धीरे सूखने लगे थे। प्रकृति का ऐसा रूप देखकर भगवान कृष्ण को इस बात का अंदाजा हो गया कि राधा रानी कितना उदास है। ऐसे में श्री कृष्ण राधा रानी से मिलने बरसाना पहुंचे और राधा रानी से मिले। </p>



<p>यह देखकर फिर से प्रकृति खिल गई। फिर भगवान कृष्ण (Lord Krishna) ने एक फूल तोड़कर राधारानी (Radha Rani) के ऊपर फेंक दिया। फिर राधारानी ने भी एक फूल श्रीकृष्ण के ऊपर फेंक दिया। इसके बाद गोपियों ने भी खुश होकर फूल एक-दूसरे में फेंके। ऐसे हर तरफ फूलों की होली खेली गई। जिस दिन फूलों की होली खेली गई उस दिन फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि थी। इसी के कारण हर साल इस दिन फूलों की होली (Holi) को फुलेरा दूज के रूप में मनाते हैं।</p>



<p>(Disclaimer: इस स्टोरी (लेख) में दी गई सूचनाएं सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित हैं। यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। thenewsworld24 .com इनकी पुष्टि नहीं करता है। इन तथ्यों को अमल में लाने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें।)</p>
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		<title>Raksha Bandhan: रक्षा बंधन मनाने के पीछे की पौराणिक कथा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[The News World 24]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 20 Aug 2021 15:44:57 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Devotional News]]></category>
		<category><![CDATA[hindu festivals]]></category>
		<category><![CDATA[indian festivals]]></category>
		<category><![CDATA[Lord Krishna]]></category>
		<category><![CDATA[Lord Vishnu]]></category>
		<category><![CDATA[Maa Lakshmi]]></category>
		<category><![CDATA[Raksha Bandhan]]></category>
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					<description><![CDATA[रक्षा बंधन  (Raksha Bandhan) का महत्व सच में सबसे अलग होता है। ऐसा पवित्र पर्व आपको दुनिया में कहीं और देखने को न मिले। ये परंपरा भारत में काफी प्राचीन समय से प्रचलित है। आज हम आपको रक्षाबंधन क्यों मनाया जाता है, कुछ पौराणिक कथाओं व मित्थको द्वारा बताने की कोशिश कर रहे है। वैसे तो रक्षाबंधन से जुडी अनेकों कथाएं प्रचलित है।]]></description>
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<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="800" height="516" src="https://thenewsworld24.com/wp-content/uploads/2021/08/Rakhi-20-08-2021-The-News-World-24.jpg" alt="Raksha Bandhan: रक्षा बंधन मनाने के पीछे की पौराणिक कथा" class="wp-image-5024" title="The News World 24" srcset="https://thenewsworld24.com/wp-content/uploads/2021/08/Rakhi-20-08-2021-The-News-World-24.jpg 800w, https://thenewsworld24.com/wp-content/uploads/2021/08/Rakhi-20-08-2021-The-News-World-24-300x194.jpg 300w, https://thenewsworld24.com/wp-content/uploads/2021/08/Rakhi-20-08-2021-The-News-World-24-768x495.jpg 768w, https://thenewsworld24.com/wp-content/uploads/2021/08/Rakhi-20-08-2021-The-News-World-24-150x97.jpg 150w" sizes="(max-width: 800px) 100vw, 800px" /><figcaption><strong>Raksha Bandhan: रक्षा बंधन मनाने के पीछे की पौराणिक कथा</strong></figcaption></figure>



<p><a href="https://thenewsworld24.com/news/devotional-news/raksha-bandhan-muhurat-2021/4856/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">रक्षा बंधन (Raksha Bandhan) भाई बहन के पवित्र रिश्ते के बीच मनाया जाने वाला पर्व है। </a>इस दिन बहन अपने भाई को रक्षा सूत्र बाँधती हैं और भाई अपनी बहनों को जीवन भर उनकी रक्षा करने का वचन देते हैं। रक्षा बंधन  (Raksha Bandhan) का पर्व श्रावण पूर्णिमा&nbsp;के लिए मनाया जाता है।</p>



<p>रक्षा बंधन (Raksha Bandhan) का पर्व दो शब्दों के मिलने से बना हुआ है,&nbsp;“रक्षा”&nbsp;और “बंधन“। संस्कृत भाषा के अनुसार, इस पर्व का मतलब होता है कि “एक ऐसा बंधन जो की रक्षा प्रदान करता हो”। यहाँ पर “रक्षा” का मतलब रक्षा प्रदान करना होता है और “बंधन” का मतलब होता है एक गांठ, एक डोर जो की रक्षा प्रदान करे।</p>



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<p>ये दोनों ही शब्द मिलकर एक पवित्र रिश्ते को जताते है। यह त्यौहार खुशी प्रदान करने वाला होता है वहीँ ये भाइयों को ये याद दिलाता है की उन्हें अपने बहनों की हमेशा रक्षा करनी है।</p>



<p>रक्षा बंधन  (Raksha Bandhan) का महत्व सच में सबसे अलग होता है। ऐसा पवित्र पर्व आपको दुनिया में कहीं और देखने को न मिले। ये परंपरा भारत में काफी प्राचीन समय से प्रचलित है। आज हम आपको रक्षाबंधन क्यों मनाया जाता है, कुछ पौराणिक कथाओं व मित्थको द्वारा बताने की कोशिश कर रहे है। वैसे तो रक्षाबंधन से जुडी अनेकों कथाएं प्रचलित है।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>रक्षा बंधन (Raksha Bandhan) क्यों मनाया जाता है </strong>:</h2>



<p>रक्षा बंधन (Raksha Bandhan) असल में इसलिए मनाया जाता है क्यूंकि ये एक बहन का भाई के प्रति प्यार और एक भाई का अपने बहन के प्रति कर्तव्य को दर्शाता है। वहीँ इसे केवल सगे भाई बहन ही नहीं बल्कि कोई भी स्त्री और पुरुष जो की इस पर्व की मर्यादा को समझते है वो इसका पालन कर सकते हैं।</p>



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<p>इस मौके पर, एक बहन अपने भाई की कलाई में राखी बांधती हैऔर भगवान से मांगती है कि उसका भाई हमेशा खुश रहे और स्वस्थ रहे। वहीँ भाई भी अपने बहन को बदले में उपहार प्रदान करता है और ये प्रतिज्ञा करता है कि कोई भी विपत्ति आ जाये वो अपनी बहन की हमेशा रक्षा करेगा।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>कृष्ण और द्रोपदी की कहानी</strong> :</h2>



<p>अपनी प्रजा की रक्षा के लिए भगवान कृष्ण (Lord Krishna) ने अपने सुदर्शन चक्र से दुष्ट राजा शिशुपाल को मारना पड़ा। इस युद्ध के दौरान कृष्ण जी की अंगूठे में गहरी चोट आई थी। जिसे देखकर द्रोपदी ने अपने वस्त्र का उपयोग कर पट्टी बांधकर खून बहने से रोक दिया था। भगवान कृष्ण&nbsp;को द्रोपदी के इस कार्य से काफी प्रसन्नता हुई और उन्होंने द्रोपदी के साथ सदैव एक भाई का रिश्ता निभाया। भगवान कृष्ण ने द्रोपदी से ये वादा भी किया की समय आने पर वो उनकी जरुर मदद करेंगे।</p>



<p>बहुत वर्षों बाद जब द्रोपदी को कुरु सभा में जुए के खेल में हारना पड़ा तब कौरवों के&nbsp;राजकुमार दुशासन ने द्रोपदी का चीर हरण करने लगा तो भगवान कृष्ण ने द्रोपदी की रक्षा कर उनकी लाज बचायी थी।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>राजा बलि और माँ लक्ष्मी :</strong></h2>



<p>भगवत पुराण और विष्णु पुराण में ऐसा बताया गया है कि बलि नाम के राजा ने भगवान विष्णु (Lord Vishnu) से उनके महल में रहने का आग्रह किया। भगवान विष्णु इस आग्रह को मान गए और राजा बलि के साथ रहने लगे। मां लक्ष्मी ने भगवान विष्णु के साथ वैकुण्ठ जाने का निश्चय किया, उन्होंने राजा बलि को रक्षा धागा बांधकर भाई बना लिया। राजा ने लक्ष्मी जी से कहा कि आप मनचाहा उपहार मांगें। </p>



<p>इस पर मां लक्ष्मी (Maa Lakshmi) ने राजा बलि से कहा कि वह भगवान विष्णु को अपने वचन से मुक्त कर दें और भगवान विष्णु को माता के साथ जानें दें। इस पर बलि ने कहा कि मैंने आपको अपनी बहन के रूप में स्वीकार किया है। इसलिए आपने जो भी इच्छा व्यक्त की है, उसे मैं जरूर पूरी करूंगा। राजा बलि ने भगवान विष्णु को अपनी वचन बंधन से मुक्त कर दिया और उन्हें मां लक्ष्मी के साथ जाने दिया।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>रानी कर्णावती और सम्राट हुमायूँ</strong> :</h2>



<p>रानी कर्णावती और&nbsp;सम्राट हुमायूँ&nbsp;की कहानी का कुछ अलग ही महत्व है। ये उस समय की बात है जब राजपूतों को मुस्लमान राजाओं से युद्ध करना पड़ रहा था। उस समय चित्तौड़ की<strong>&nbsp;</strong>रानी कर्णावती&nbsp;हुआ करती थी। वो एक विधवा रानी थी।</p>



<p>गुजरात के सुल्तान बहादुर साह ने उनके राज्य पर हमला कर दिया। ऐसे में रानी अपने राज्य को बचा सकने में असमर्थ होने लगी। इस पर उन्होंने एक राखी सम्राट हुमायूँ को अपनी रक्षा करने के लिए एक राखी भेजी। हुमायूँ ने भी राखी का मान रखते हुए अपनी बहन की रक्षा हेतु अपनी एक सेना की टुकड़ी को चित्तौड़ भेज दिया। जिसके बाद बहादुर साह की सेना को पीछे हटना पड़ा। </p>
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